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|| मैं, 100 प्रतिशत मतदान करके, 100 प्रतिशत राष्ट्रवादी चिन्तन अपना कर, विदेशी कम्पनियों का बहिष्कार व स्वदेशी क सम्पूर्ण आग्रह को आत्मसात करके, देश भक्त लोगो को संगठित करने हेतु तथा योगमय भारत का निर्माण करने हेतु “भारत स्वाभिमान से जुडकर 100 प्रतिशत स्वस्थ, सम्रध्द, संस्कारवान भारत बनाउंगा एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान जगाउंगा। || ||
|| पंच महाव्रत 1 भगवान ने आत्मा-कल्याण व विश्व-कल्याण के लिए मेरा चयन किया है। 2 जीवन को राष्ट्र सेवा एवं मानव सेवा का एक बहुत बडा उद्देश्य मिला है। 3 मैं, अपना मूल्यांकन कभी भी कम करके नहीं आकूंगा। 4 मैं, जीवन मे पुण्य भावो का अखण्ड प्रवाह बनाए रखूँगा। 5 मैं, परमात्मा, गुरु एवं राष्ट्र का सजग जागरुक प्रतिनिधि बनकर जिऊंगा। ||
|| मैं एक व्यक्ति नहीं अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र एवं भगवान का प्रतिनिधि हूँ। मेरे तन मन में मेरा वतन बसता है और मेरे रोम-रोम में ओंकार समाया हुआ है। ||
|| गुरु सत्ता व भगवान सत्ता को सर्वोच्च मानकर पूर्ण समर्पण, सामर्थ्य पुरुषार्थ एवं समग्र पराक्रम (आक्रामकता) के साथ स्वधर्म, स्वकर्तव्य-कर्म का निर्वाहन करते हुए साधना एवं राष्ट्र पुरुष की आराधना करना ही हमारे जीवन का ध्येय है। जीवन मे प्राप्त होने वाला ज्ञान, सम्रध्दि, सफलता, सिध्दि, साम्राज्य, वैभव, यश आदि सम्पुर्ण विरासत को गुरु एवं भगवत क्रपा का प्रसाद मानकर सदा निरभिमानी रहना, यही हमारा कार्यदर्शन है। ||
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जीवन के प्रति द्रष्टिकोण-
अपने शरीर, इन्द्रियों व मन पर संयम रखते हुए स्वयं को भगवान के हाथों में सौंप दें। फिर जीवन मे जो कुछ घटित होगा, वह शुभ होगा। जीवन में सफलता, सिध्दि व समाधि सहज उपलब्धि होगी। ||
|| मैं अपनी अपूर्णताओं को पूर्णता में, निर्बलताओं को बल में, अज्ञान को ज्ञान में, संशय और अविश्वास को विश्वस में, पराजय को विजय में तथा अकर्मण्यता को कर्तव्य-निष्ठा में परिवर्तित कर, पूरे पराक्रम व शक्ति के साथ स्वधर्म व राष्ट्रधर्म का निर्वाह करूँगा।