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भारत स्वाभिमान यात्रा

..... आचार्य बालकृष्ण

  

भारत स्वाभिमान यात्रा का शुभारम्भ द्वारिका (गुजरात) से की गयी। जिस भारत ने आर्थिक तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पूरे विश्व का नेतृत्व किया था वह भारत आज अपनी अतीत के गौरव-गरिमा को खोते जा रहा है। जो भारत समृद्धि के शिखर पर था आज उस भारत में 83 करोड़ 60 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे हैं। वे प्रतिदिन 20 रुपये की आमदनी पर बेवशी में जी रहे हैं।

जो स्वदेश सदाचार में नंबर वन था वहां आज भ्रष्टाचार, दुराचार में शिखर पर हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य है कि हमारे देश में जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट दूरदर्शी और मजबूत नीति नहीं होने के कारण 2 करोड़, 38 लाख, 39 हजार, 945 नये बच्चे प्रतिवर्ष पैदा हो रहे हैं। (जनगणना विभाग की एक रिपोर्ट के आधार पर)। भारत स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से देश को सामाजिक, आर्थिक न्याय एवं राष्ट्र निर्माण का श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज का ध्येय है। यदि हम सामाजिक न्याय की बात करें तो आजादी के 64 वर्ष बाद भी देश के 84 करोड लोगों के लिए रोटी, कपडा और मकान जैसी बुनियादी जरुरतों की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में 'विकास' स्वामी जी का सपना है। देश के अंदर भूख से 60 से 70 लाख लोग मरते है, 60 लाख 95 हजार मासूम बच्चों गंदगी और कुपोषण से मौत की नींद सोते है। हमारे लिए इससें बडी शर्म की बात क्या हो सकती है? देश में पहले एक सुदामा की दरिद्रता श्रीकृष्ण ने दूर की, आज भारत में 84 करोड सुदामाओं को दो वक्त की रोटी नहीं मिलती है । वही देश का तकरीबन 300 करोड रुपया बेइमानों ने स्विस तथा अन्य कई बैकों में जमा करा दिया है। ह्रामन डेवलपमेन्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का नाम 34वे स्थान पर आता है। इससे हम देश के नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं का आकलन कर सकते है। सुप्रीमकोर्ट से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज देश के न्यायालयों में 3 करोड, 33 लाख, 5 हजार, 8 सौ 45 मुकदमें लम्बित है। जिसके निस्तारण में कई दशक समय लगेगा। इसके अतिरिक्त हर दिन नये मामले कोर्ट में आ जाते हैं। हम उन लोगों को न्याय दे ही नही पाते। हम देश के इतने बडी आबादी के लोगों के साथ कैसे न्याय कर पायेगें? चारो तरफ गंदगी, बेवसी, लाचारी एवं नक्सलवाद, माओवाद के कारण खून से लथपथ भारत को देखकर हर देशभक्त भारतीय का दिल रोता है। आज हमारी रोटी, बेटी, गंगा, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति एवं संस्कारों को नष्ट करने के लिए साजिश रची जा रही है। एक तरफ दुश्मन देश, हमारी सीमाओं पर षडयंत्र रच रहा है देश की आंतरिक सुरक्षा बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है और जिन लोगों के हाथों में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वे लोग आंतकवाद और माओवाद से लडने में विफल हो रहे है। कभी हिन्दू आंतकवाद तथा भगवा आतंकवाद का राग अलापने लग जाते है। भगवा हमेशा देश, संस्कृति तथा मानवतावाद का रक्षक रहा है। भगवा हमारे संन्यास परम्परा का आदर्श है। भगवा हमारे तिरंगा में लहराता हुआ भारत की आन, बान और शान का प्रतीक है। भगवा राष्ट्र्वादी, मानवतावादी, आध्यात्मवादी परम्परा का प्रखर प्रहरी है। इसको आतंकवाद से जोडना देश, धर्म, संस्कृति और करोडों ॠषि-मुनियों का अपमान है। जहां देश में हमारे सामने हर कदम पर चुनौतियों और समस्याएं मुंह बाए खडी हैं वही विश्व में हमारी स्थिति सम्मानजनक नही है। आज आजादी के 64 वर्ष बाद भी अनिवार्य प्राइमरी, नि:शुल्क शिक्षा का अभाव है। यू.जी.सी. की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत पद रिक्त पडे है। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को भी उपलब्ध कराने में नाकाम सिद्घ हो रही है। अस्पतालों में 4 लाख चिकित्सक, 10 लाख नर्स, 2 लाख दंत चिकित्सकों की आवश्यकता है। देश में 44 प्रतिशत घरों तक ही बिजली की व्यवस्था है। 54 प्रतिशत घरों में अधेरा व्याप्त है। 50 प्रतिशत किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं उपलब्ध है। जल प्रबंधन ठीक न होने से हमारा आधा भारत सूखा और आधा भारत बाढ से त्रस्त रहता है। यदि हम सडकों की बात करें तो आजादी के बाद लगभग 7 गुना सडके बढी है वही 28 गुना वाहन भी बढ गये है, यही कारण है कि प्रतिवर्ष एक बडी संख्या मे लोगो की मौत मार्ग दुर्घटनाओं में हो रही है। एक लाख करोड रुपये का डीजल खर्च हो रहा है। प्रदूषण से कई तरह का रोग फैल रहा है। खराब सडकों की वजह से 50 प्रतिशत लोग कमरदर्द की गिरफ्त में आ जाते है तथा गाडियों की भी उम्र कम हो जाती है। लोगो का आधा जीवन सडकों पर बर्बाद हो जाता है। यह समय हमारे देश के विकास में लग सकता था। यदि हम विश्व स्तर पर अपना मूल्यांकर करें तो, न तो हमारे नागरिक, न हमारे पैसे और न हमारी भाषा का न ही हमारे संस्कृति और सभ्यता का सम्मान है। विश्व की बडी संस्थाए चाहे यू.एन.ओ., वलर्ड बैंक, डब्ल्यू.टी.ओ., तथा डब्ल्यू.एच.ओ., आदि में भारत का प्रतिनिधित्व दयनीय स्थिति में है। 'भारत स्वाभिमान' से भारत के 600 जिलों, हजारों तहसीलों एवं 1 लाख गावों में गुजरने वाली एक लाख से लम्बी यात्रा के माध्यम से देश के करोडो लोगो का खोया हुआ स्वाभिमान जागेगा, इससे खोयी हुई गरिमा प्राप्त कर भारत विश्व का आर्थिक, आध्यात्मिक शक्ति के रुप में खडा होगा । भारत स्वाभिमान यात्रा के मुख्य लक्ष्य है-भ्रष्टाचार, कालाधन, भ्रष्ट व्यवस्थाओं को समाप्त करना, भारत का लूटा 300 करोड रुपया 70 देशों मे जमा है उसे देश में लाना है। विदेशी सरकारों, विदेशी कम्पनियों द्वारा देश को लूटने के षडयंत्र को खत्म करना और राष्ट्र के नागरिकों के चरित्र निर्माण कर सम्पूर्ण भारतवासियों का शिव जैसा पवित्र चरित्र बनाना हमारा ध्येय है। आज ॠषि पुत्र असुर पुत्र बन्ते जा रहे है। राम-कृष्ण की संताने कही रावण और कंस के पद चिन्हों पर चलते दिख रहे है। हमें अपने सम्पूर्ण सामथर्य से राष्ट्र और राष्ट्रवासियों को ऊंचा उठाना है, भारत और भारतीयों का स्वाभिमान बढाना है।


 
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