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चिकित्सक संग़ठन

   
आज भारत के 115 करोड़ लोगों में से अधिकतर बीमार हैं तथा अधिकांश लोग ऐसे हैं जो बीमार होने पर अपना इलाज नहीं करवा पाते। हम देश के अंतिम व्यक्ति को स्वस्थ बनाना चाहते हैं। देश की 90 से 99 प्रतिशत बीमारियों का इलाज या रोगों का उपचार हम अपनी परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों से करेंगे। शल्य चिकित्सा या आपातकालीन चिकित्सा में ही हम विदेशी चिकित्सा पद्धतियों का आश्रय लेंगे। हम एलोपैथी की जीवन रक्षक दवाओं या आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के ज्ञान व अनुसंधान के विरोधी नहीं हैं। स्वदेशी उपचार स्थाई, सस्ता, सरल, निर्दोष, सर्वांगींण व पूर्ण वैज्ञानिक है तथा इससे देश का प्रतिवर्ष हो रहा लाखों-करोड़ों रुपयों का दोहन व दवाओं के खतरनाक दुष्प्रभाओं से भी देश को बचाना है। अंग्रेजों के शासनकाल से ही तिरस्कार व उपेक्षा झेल रही स्वदेशी चिकित्सा विधाओं का आजाद की सरकारों ने भी अपमान किया है हम स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। हम सभी राष्ट्रभक्त चिकित्सकों से आह्वान करते हैं कि यदि आप भी इस आंदोलन में सक्रिय रुप से सहभागी बनिए और इन भ्रष्ट नीतियों, कानूनों एवं व्यवस्थाओं को उखाड़ फैंकने व देश को बचाने के लिए आगे आइए और एक सच्चे भारतीय होने का फर्ज निभाईये। जिससे हमारे भारत में स्वदेशी चिकित्सा का प्रचार-प्रसार हो तथा भारत में किसी की भी मौत भूख व बिमारियों से न हो।

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|| ||  पंच महाव्रत 1 भगवान ने आत्म-कल्याण व विश्व-कल्याण के लिए मेरा चयन किया है। 2 जीवन को राष्ट्र सेवा एवं मानव सेवा का एक बहुत बडा उद्देश्य मिला है। 3 मैं, अपना मूल्यांकन कभी भी कम करके नहीं आकूंगा। 4 मैं, जीवन मे पुण्य भावो का अखण्ड प्रवाह बनाए रखूँगा। 5 मैं, परमात्मा, गुरु एवं राष्ट्र का सजग जागरुक प्रतिनिधि बनकर जिऊंगा। ||