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    गुरुजन/आचार्यगण/अध्यापकगण/शिक्षकगण किसी विद्यार्थी को मात्र विद्या अध्ययन ही नहीं करवाते वरन उसे एक अच्छा राष्ट्रभक्त नागरिक भी बनाते हैं। भारत स्वाभिमान आन्दोलन में हमें राष्ट्र का चरित्र उन्नत बनाना है भारत को दोबारा विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठापित करना है हमारे शहीदों ने जैसा स्वप्न देखा था वैसा भारत बनाना है। देश के सभी विद्यार्थियों , महाविद्यालयों के शिक्षक भारत स्वाभिमान से जुड़कर राष्ट्रोत्थान के इस पुनीत अभियान में अपना सहयोग देवें तथा भारत में स्वदेशी, संस्कारों व मूल्यों पर आधारित नवीन शिक्षा व्यवस्था की प्रतिष्ठापन में अपना योगदान दें। आजादी के 63 वर्ष बाद भी यदि भारत के 50 प्रतिशत लोग अनपढ हैं, हमें उच्च तकनीकी शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है। गरीब व अमीर के लिये एक जैसी शिक्षा में उच्च तकनीकी शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है। गरीब व अमीर के लिये जैसी शिक्षा व्यवस्था नहीं है, शिक्षा में चरित्र-निर्माण के लिये संस्कार व योग शिक्षा का समावेश नहीं है। हमारे पूर्वजों के ज्ञान, जीवन व चरित्र के बारे में हमारी शिक्षा व्यवस्था में अपमानजनक बातें पढाई जाती हैं तो क्या ये सब हमारी शिक्षा व्यवस्था की असफलता नहीं? भारत सरकार के एक अनुमान के अनुसार विद्यालयों में शिक्षा के लिये प्रवेश पाने वाले 18 करोड़ विद्यार्थियों में से मात्र 1 करोड़ विद्यार्थी ही अपने उच्च-शिक्षा प्राप्ति के लक्ष्य में सफल हो पाते हैं यह हमारी शिक्षा-व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामयाबी है। सभी शिक्षकगणों से आह्वान है कि आप भी इस आन्दोलन में सक्रिय रुप से सहभागी बनिए और इन भ्रष्ट नीतियों, कानूनों एवं व्यवस्थाओं को उखाड़ फैंकने व देश को बचाने के लिए आगे आइए और एक स्च्चे भारतीय होने का फर्ज निभाइये।


 
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