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दिनाक :२६ नवम्बर २०११ ----
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शीर्षक :
भारत स्वाभिमान की मुक्य माँगे व मुद्दे क्या है?-
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विचार (ब्लाग) :
1- कालेधन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित करने का कानून बनवाना व दिदेशों में कालाधन जमा करने को राष्ट्रद्रोह का अपराध घोषित करवा के देश का लूटा हुआ 400 लाख करोड रुपये देश को दिलवाया। 2- भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आजीवन कारावास या मृत्यृ दण्ड का कानून बनवाया साथ ही लोकपाल जैसे कठोर कानून बनवाकर भ्रष्टाचार के सभी स्त्रोतों (अवैध खनन करके राष्ट्रीय सम्पदाओं की लूट, रिश्वतखोरी, टैक्सचोरी व सरकारी विकास योजनाओं का धन लूटना आदि ) पर पूर्ण अंकुश लगवाना 3- अंग्रेजों के समय से चली आ रही पक्षपात व अन्यायपूर्ण गलत नीतियाँ, कानूनों व भ्रष्ट व्यवस्थाओं का राष्ट्रहित मे पूर्ण परिवर्तन करवाना
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दिनाक :२६ अक्टूबर २०११ ----
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शीर्षक :
भारत स्वाभिमान की मुक्य माँगे व मुद्दे क्या है?-
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विचार (ब्लाग) :
1- कालेधन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित करने का कानून बनवाना व दिदेशों में कालाधन जमा करने को राष्ट्रद्रोह का अपराध घोषित करवा के देश का लूटा हुआ 400 लाख करोड रुपये देश को दिलवाया। 2- भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आजीवन कारावास या मृत्यृ दण्ड का कानून बनवाया साथ ही लोकपाल जैसे कठोर कानून बनवाकर भ्रष्टाचार के सभी स्त्रोतों (अवैध खनन करके राष्ट्रीय सम्पदाओं की लूट, रिश्वतखोरी, टैक्सचोरी व सरकारी विकास योजनाओं का धन लूटना आदि ) पर पूर्ण अंकुश लगवाना 3- अंग्रेजों के समय से चली आ रही पक्षपात व अन्यायपूर्ण गलत नीतियाँ, कानूनों व भ्रष्ट व्यवस्थाओं का राष्ट्रहित मे पूर्ण परिवर्तन करवाना
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दिनाक :२६-11
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शीर्षक :
भारत स्वाभिमान की मुक्य माँगे व मुद्दे क्या है?-
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विचार (ब्लाग) :
1- कालेधन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित करने का कानून बनवाना व दिदेशों में कालाधन जमा करने को राष्ट्रद्रोह का अपराध घोषित करवा के देश का लूटा हुआ 400 लाख करोड रुपये देश को दिलवाया।
2- भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आजीवन कारावास या मृत्यृ दण्ड का कानून बनवाया साथ ही लोकपाल जैसे कठोर कानून बनवाकर भ्रष्टाचार के सभी स्त्रोतों (अवैध खनन करके राष्ट्रीय सम्पदाओं की लूट, रिश्वतखोरी, टैक्सचोरी व सरकारी विकास योजनाओं का धन लूटना आदि ) पर पूर्ण अंकुश लगवाना 3- अंग्रेजों के समय से चली आ रही पक्षपात व अन्यायपूर्ण गलत नीतियाँ, कानूनों व भ्रष्ट व्यवस्थाओं का राष्ट्रहित मे पूर्ण परिवर्तन करवाना
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दिनाक :२३ अक्टूबर 2011
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शीर्षक :
क्या कुछ चन्द लोगों के तप व पुरुषार्थ से देश बच पायेगा?-
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विचार (ब्लाग) :
जब भ्रष्टाचार करके कालाधन जमा करने वाले कुछ चन्द लोग देश को बर्बाद करके बेच सकते है। तो चन्द लोग तप, पुरुषार्थ व सेवा करके, संगठित होकर देश को बचा क्यों नही सकते? यही हमारी संस्कृति भी कहती है- ‘भ्रद्रमिच्छन्त ॠषय: स्वर्विदस्तपो दीक्षामुपनिषेदुरग्रे। ततो राष्ट्रं बलमोजश्य जातं तदस्मै देवा उपसंनमन्तु’, यही हमारे पूर्वजों का आदर्श व वेदों का आदेश है।
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दिनाक :१९ अक्टूबर २०११....... -
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शीर्षक :
व्यवस्था परिवर्तन-
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विचार (ब्लाग) :
सन 1894 के बने भूमि-अधिग्रहण कानून के नाम पर किसानों के साथ अन्याय व अत्याचार नहीं होगा। किसान को अकुशल श्रमिक के स्थान पर कुशल श्रमिक का दर्जा मिलेगा और किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारण नीति के स्थान पर उनकी उपज के लिए लागत मूल्य निर्धारण नीति बनेगी व राष्ट्रीय किसान आय आयोग का गठन होगा। रासानिक खादें व विषैले कीटानाशकों के स्थान पर जैविक खाद व कीटनाशक (बायो-फर्टिलाईजर व पेस्टीसाईड्स) का प्रयोग होने से गोधन, पशुधन धरती का खेत व इंसान का पेट-सब कुछ सुरक्षित होगा। शिक्षा के क्षेत्र में भाषा के नाम पर चल रहा पक्षपात व अन्याय बन्द होगा तथा राष्ट्रभाषा व अन्य भारतीयों भाषाओं-गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगू, कन्नड, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, बांग्ला व असमिया आदि भारतीय भाषाओं में मेडिकल काँलेज, इन्जीनियरिंग काँलेज तथा कृषि विश्वविद्यालय में पढने का अधिकर मिलने से देश के गरीब, मजदूर, कारीगर, किसान व गाँव के बच्चों को भी डाँक्टर, इन्जीनियर व वैज्ञानिक आदि बनने का अवसर मिलेगा और जर्मनी, जापान, चीन, फ्रांस व रशिया आदि देशों की तरह हमारे देश के लोगों को भी देश की भाषा में विज्ञान व तकनीकी की शिक्षा मिलेगी। अनिवार्य मतदान, स्टेट फंडिंग इलैक्शन व प्रधानमंत्री के चुनाव सीधे जनता द्वारा होने से लोकतन्त्र, लूटतन्त्र व भ्रष्टतन्त्र होने से बचेगा साथ ही निष्कलंक, बेदाग व योग्य (नाँन करेष्ट एवं कैपेल्बल) लोगों का राजनीति में बहुमत होने से राजनीति का शुद्घिकरण व पूनर्जन्म होगा और एक आदर्श राजनैतिक व्यवस्था देश को मिलेगी।
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